ढाई घर का अणत बाजूबंद भाग 3
राजस्थान राजपूतों के इतिहास उनके शौर्य से, ऊँचे ऊँचे टीलों से,ऊँची ऊँची अरावली की पर्वत मालाओं से, पर्वतों की चोटियों पर बने हुए बड़े - बड़े किलों से, उन किलों में गूँजती हुई विभिन्न शौर्यपूर्ण गाथाओं से, ठकुराणियों के जौहर की चीत्कारियों से, विभिन्न प्रणय गाथाओं से, रणठाकुरों की तलवारों से आने वाली खनक से, राजस्थानी जहाज कहलाने वाले ऊँटों की लम्बी - लम्बी कतारों से, सुखी नदियों के घुमावदार पाटों के दोनों ओर के बीहड़ जँगलों से,गाडिया लोहारों, कानबेलियों ( सपेरों ) के कारण आज भी पूरे विश्व में जाना जाता है। भारत वर्ष के इस अनोखे प्रान्त में बने रजवाड़ों के सुन्दर - सुंदर महल, उनमें की गयी राजपूताना शैली की पच्चीकारी, वास्तु कला के दर्शनीय नमूनें, जो आज भी जयपुर, आमेर, जोधपुर, चित्तौड़, उदयपुर, अजमेर, पुष्कर, नाथद्वारा, पाली, टोंक, बीकानेर , जैसलमेर, बाढ़मेर, नागौर, झुंझुनू,मारवाड़ , सवाई माधोपुर, अलवर, भरतपुर,कोटा आदि नगरों के वैभव, झुंझुनू में राणी सती के मंदिर, कैला देवी (करौली ) के भव्य मंदिर, भरतपुर के पास मेहन्दीपुर में सिद्ध बालाजी के सिद्ध मंदिर, खाटूश्याम जी में श्याम जी के भव्य म...