ढाई घर का अणत बाजूबंद भाग १
सम्पूर्ण भारत वर्ष के पुरातन इतिहास एवं उसकी पौराणिक कथाओं के पढ़ने - समझने से हर कथानक एक गूढ़ कथासार के रूप में सामने आया है। सतयुग के पूर्व में देवासुर संग्राम, त्रेतायुग में राम - रावण युद्ध, द्वापर युग में महाभारत का महायुद्ध तथा भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन के भीरु होकर रथ के पृष्ठ भाग में बैठ जाने पर उसे जीवन सार के रूप में दिया गया उपदेश जो आज "गीता या श्रीमद्भागवत गीता" को एक दर्शन सार के रूप में तथा कलयुग में रजवाड़ों के, राजा महाराजाओं के परस्पर संघर्ष व शौर्य, मुगलों व अंग्रेज शासकों के विरुद्ध लड़ते हुए अपने प्राणों को न्यौछावर करते हुए शूरवीर राजस्थानी वीर बाँकुरो तथा राजस्थानियों राणियों के जौहर की गाथाओं ने इतिहास के पन्नों को भर दिया है। यों तो इतिहासकारों ने समय- समय पर भारतीय शौर्य गाथाओं का वर्णन किया है। परंतु राजस्थान के कई भागों के पन्नों के इतिहास की धूल झाड़ कर उनमें छिपी हुई कई गाथाओं को प्रकाश में इतिहासकार नहीं ला पाये। राजस्थान के मारवाड़ राज्य के संस्थापकों राठौड़ वंशज महाराज जसवंत सिंह जी प्रथम के युग के समकालीन रियानगर ( सेठों की रिया) तथा विलाड़ा क...