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ढाई घर का अणत बाजूबंद भाग 4

  जब नांही बाई इस घर में ब्याह कर आयी थीं तो उनके साथ एक सेविका जिन्दो बाई भी आयी थी। जो नांही बाई की ही हम उम्र थी या शायद 4- 5 वर्ष बड़ी रही होगी। गरीब परिवार की जिन्दो बाई को नांही बाई की माँ ने नांही की सेवा - सहायता के लिए उसे साथ भेज दिया था। जिन्दो ने भी सेठ ढोला की हवेली का सारा काम इस कदर सम्भाल लिया था कि जैसे वह पुराने समय से इस घर में रहती आयी हो। रसोई का सारा काम जिन्दो बाई ही करवाती थी। उसकी सहायता के लिए हवेली के कर्मचारी गण रहते थे । हवेली में क्या बनना है? क्या सामान बाज़ार से आना है इसके बारें में नांही बाई को कोई परवाह नहीं थी। इस सबका का जिम्मा जिन्दो बाई के ही कांधो पर था। सेठ ढोला भी उसके किसी काम मे अवरोध नही करते थे। जो जिन्दो बाई ने कह दिया वही सही है। यह मानकर हवेली के कामकाज में कोई भी दखलंदाजी नही करता था। हवेली की रसोई में सेठ, सेठाणी, कमर्चारी गण जिन्दो बाई तथा गद्दी के कारिंदों के अतिरिक्त बाहर के सभी व्यापारियों के लिए भी भोजन बनता था। इस सबकी व्यवस्था जिन्दो बाई के सिर पर ही थी। इस सब जिम्मेदारी को जिन्दो बाई भी बहुत ही अच्छे से निभाती भी थी। उसके निर...